MLSU प्रोफेसर महेंद्र सिंह ढाका को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सेवा समाप्ति आदेश पर रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना विभागीय जांच स्थायी कर्मचारी को हटाने पर सवाल उठाते हुए अंतरिम राहत दी
Udaipur, May 28, 2026: Rajasthan News राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (MLSU) के फिजिक्स (Physics) विभाग के प्रोफेसर महेंद्र सिंह ढाका को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवा समाप्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर की एकल पीठ ने विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
MLSU को कोर्ट की फटकार
कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में माना कि बिना नियमित विभागीय जांच के किसी स्थायी कर्मचारी को सेवा से हटाया जाना प्रथम दृष्टया मनमाना प्रतीत होता है। इसके बाद विश्वविद्यालय द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेश के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। Rajasthan High Court
क्या था मामला
गौरतलब है कि MLSU (सुखड़िया विश्वविद्यालय ने 23 दिसंबर 2025 को प्रो. महेंद्र सिंह ढाका की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। यह कार्रवाई वर्ष 2010 की भर्तियों में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद की गई थी।
प्रो. ढाका की नियुक्ति वर्ष 2012 में OBC वर्ग के अंतर्गत एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई थी। वर्ष 2015 में उन्हें कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत पदोन्नति भी मिली थी। बाद में वर्ष 2022 में राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देश पर गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि उनके पास वैध OBC प्रमाण पत्र नहीं था। Udaipur MLSU Recruitment Scandal
जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने और सेवा से हटाने का निर्णय लिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार ने 23 दिसंबर 2025 को उन्हें पद से हटाने का आदेश जारी किया। Udaipur News
ढाका ने स्वयं पैरवी की
प्रो. महेंद्र सिंह ढाका ने स्वयं हाईकोर्ट में पक्ष रखते हुए दलील दी कि वे विश्वविद्यालय के स्थायी कर्मचारी हैं और विश्वविद्यालय के स्टैच्यूट-73 के अनुसार किसी नियमित कर्मचारी को सेवा से हटाने से पहले विधिवत अनुशासनात्मक जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनके मामले में ऐसी कोई जांच नहीं की गई।
MLSU और राज्य सरकार को नोटिस
मामले की अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से प्रो. ढाका को राहत मिली है, जबकि विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
