बस बॉडी निर्माण नियमों में राहत की मांग
उदयपुर 28 जनवरी 2026। बस बॉडी निर्माण हेतु लागू कोड के संबंध में राजस्थान बस बॉडी एसोसिएशन की विभिन्न समस्याओ के समाधान हेतु नियमो में राहत प्रदान करने के लिए उदयपुर संभागीय आयुक्त एवं ज़िला कलेक्टर को ज्ञापन दिया। स्लीपर कोच बसों में आग लगने की घटनाओ के बाद केंद्र सरकार ने बस निर्माण को केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों या मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा निर्मित करने के फैसले से संभाग के मोटर बॉडी बिल्डर्स में भारी असंतोष एवं आक्रोश है।
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आपको बता दे की बीते 6 महीनो में देश के विभिन्न हिस्सों में स्लीपर कोच बसों में आग लगने की 6 घटनाओ में 145 यात्रियों की मौत के बाद परिवहन मंत्रालय का मानना है कि मौजूदा स्लीपर बसों को नए सुरक्षा मानकों के अनुसार अपडेट करना आवश्यक है जिसके तहत फायर डिटेक्शन सिस्टम, आपातकालीन निकास, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर ड्राउज़ीनेस इंडिकेटर जैसे उपकरण अनिवार्य किये जाएंगे ताकि हादसे की स्थिति में यात्रियों को समय रहते बाहर निकाला जा सके।
श्री विश्वकर्मा मोटर बॉडी उद्योग एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष राम जी सुथार ने बताया की बॉडी निर्माण में सरकार के नए कोड से छोटे एवं लघु उद्योग को बहुत तकलीफ हो रही है। हम ज्ञापन के माध्यम से सरकार को अवगत करवाना चाहते है कि उसको सरल करवाने के लिए सरकार से मांग कर रहे है। अगर सरकार यह सरल नहीं करती उदयपुर संभाग के एक लाख से अधिक लोगो के रोज़गार प्रभावित होंगे। उन्होंने बताया की वह निर्माण में पूरी तरह के सुरक्षा मानकों का ध्यान रख रहे है।
उन्होंने बताया कि कारखानो में कई बस बॉडी बन कर तैयार है लेकिन डिलीवर नहीं कर पा रहे है। उनको पास करवाने के लिए बस ऑपरेटर्स भी परेशान है।
विकास बॉडी बिल्डर्स के संचालक विजय राम शर्मा ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा के लोकल बस बॉडी निर्माता 'हथौड़ा छाप' बताये जाने पर दुःख जताया की और बताया की उनका मुख्य औज़ार ही हथौड़ा है, हथौड़े के बगैर उनका कार्य संभव ही नहीं है।
श्री विश्वकर्मा मोटर बॉडी उद्योग एसोसिएशन ने ज्ञापन के माध्यम से बताया की जैसलमेर में घटित बस दुर्घटना के उपरांत सार्वजानिक विमर्श में बस बॉडी निर्माण की गुणवत्ता को ही प्रमुख कारण बताया गया जबकि किसी भी दुर्घटना के लिय चालक, सड़क संरचना, वाहन की गति, यांत्रिक स्थिति, पर्यावरणीय परिथितियाँ व् अनेक कारक उत्तरदायी होते है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि उक्त दुर्घटना से संबंहित FSL/तकनिकी जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजानिक न किये जाने के कारण वास्तविक कारणों का निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव नहो हो सका है।
श्री विश्वकर्मा मोटर बॉडी उद्योग एसोसिएशन के अध्यक्ष रामजी सुथार ने बताया कि बस बॉडी निर्माण हेतु लागू कोड संख्या 119, 52, 53 में बस बॉडी निर्माण से संबंधित नियमो को अत्यधिक कठोर बनाये जाने से लघु एवं परंपरागत उद्यमियो के समक्ष गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही है तथा पंजीकरण एवं लाइसेंस प्रक्रिया की जटिलता, उच्च शुल्क, तकनीकी मानकों की लागत तथा पर्याप्त टेस्टिंग सुविधाओं के अभाव में अनेक इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुन्ध रही है।
उन्होंने बताया कि इन लघु उद्योगों के बंद होने से सारा मोटर बॉडी निर्माण कार्य गिने चुने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास चला जाएगा और उनका इस क्षेत्र में कधीकर हो जाएगा जिससे बस बॉडी निर्माण करने में सक्षम इन लघु उद्योगों और लाखो श्रमिक परिवारों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। इस प्रकार की स्थिति से न केवल 'आत्मनिर्भर भारत', 'मेक इन इंडिया' एवं 'वोकल फॉर लोकल' की भावना के प्रतिकूल होगी।
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