उदयपुर के सर्राफा व्यापारियों में नाराजगी; प्रधान मंत्री कि सोना खरीद टालने की अपील पर जताई चिंता
व्यापारियों ने कहा— "लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी, छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों पर पड़ सकता है असर"; कुछ ने जताई बड़े बदलाव की आशंका
उदयपुर 12 मई 2026 - प्रधानमंत्री द्वारा हैदराबाद में आयोजित एक सभा के दौरान लोगों से एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्रा नहीं करने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की अपील किए जाने के बाद अब देश भर में सर्राफा व्यापारियों में नाराज़गी का माहौल देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में उदयपुर के सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की अपील से सर्राफा कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ेगा और छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। तो कुछ का कहना है की प्रधानमंत्री अगर अपील कर रहें हैं तो जरुरी कुछ बड़ा होने वाला है।
परिवारों की आजीविका
उदयपुर के कई सर्राफा व्यापारियों ने कहा कि सोने का व्यापार लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। बाज़ार में बिक्री कम होने से स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर भी प्रभावित होंगे। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि सर्राफा व्यापार को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया जाए ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।
व्यापारियों का कहना है कि पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और टैक्स व्यवस्था के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। अब यदि आम लोगों में यह संदेश जाएगा कि सोना खरीदना टालना चाहिए, तो बाज़ार में मंदी और बढ़ सकती है। खासतौर पर छोटे ज्वेलर्स, कारीगर और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
भ्रम की स्थिति
वहीं कुछ व्यापारियों का मानना है कि लोगों को निवेश के विभिन्न विकल्पों के बारे में जागरूक करना अलग बात है, लेकिन किसी विशेष वस्तु की खरीद को लंबे समय तक टालने की अपील से बाज़ार में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में सर्राफा बाजार में कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
श्री राजस्थान सर्राफा संग जयपुर के संरक्षक इन्दर सिंह मेहता ने कहा कि, "सोना केवल निवेश का माध्यम ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा है। शादी-विवाह, त्योहार और पारिवारिक आयोजनों में सोने की खरीदारी लंबे समय से परंपरा रही है। ऐसे में यदि लोग सोना खरीदने से दूरी बनाने लगेंगे तो इसका सीधा असर बाज़ार की बिक्री और रोजगार पर पड़ेगा। उन्होंने कहा की विदेश यात्रा की बात तो समझ में आती है क्यों की हिंदुस्तान खुद ही इतना खूबसूरत देश है की लोग चाहे तो कुछ समय के लिए देश में ही रेह कर नज़रों का आनंद उठा सकते है लेकिन प्रधानमंत्री जी ने सोना एक साल तक नहीं खरीदने की जो बात कही है वो कही से भी तर्क सांगत नहीं लगती। हिंदुस्तान की इकोनॉमी आज पूरी तरह से स्वर्ण पर ही तिकी हुई है ,जब पूरी दुनिया में क्राइसिस था तब हिंदुस्तान ही एक ऐसा देश था जो खुद को स्थापित कर पाया था।"
देश आर्थिक रूप से मज़बूत बन रहा है???
उन्होंने कहा की आज देश में लग भाग 2 करोड़ लोग प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं ,सक्षम व्यापारी जो एक सा तक फिर भी अपना गुज़ारा चला लेगा पर ये छोटे व्यापारी और मज़दुर लोग क्या करेंगे, ऐसे में इनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो जाएगी। उन्होंने कहा की एक तरफ आप कहते हैं की देश आर्थिक रूप से मज़बूत बनता जा रहा है और दूसरी तरफ आप कहते है की स्वर्ण नहीं खरीदें। उन्होंने कहा की वह प्रधानमंत्री जी से निवेदन करते हैं की वह ऐसे बयान ना दें।
सोना एक निवेश है
सर्राफा बाज़ार के वरिष्ठ व्यापारी गणेश डागलिया ने कहा की सोना हर एक व्यक्ति के जीवन में एक जरुरी वस्तु है , क्यों की सोना ऐसी चीज है की जिसे जरुरत के वक़्त कभी उसे बेचा जा सकता है और अपनी जरुरत के लिए उस रकम को इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा की हमारे देश में भी कई सोने की खाने हैं, सरकार इन खानों में से सोना निकलने पर क्यों ज़ोर नहीं दे रही। व्यापार पर इसके असर को लेकर उन्होने कहा की नोट बंदी के बाद न सिर्फ सर्राफा बाज़ार की सभी व्यपार प्रभावित है, जहां एक तरफ ये दावे किये जाते हैं की इकॉनमी ग्रो कर रही हैं तो एक तरह व्यापर और व्यापारियों के हालत बिलकुल विपरित दिखाई देते है।
श्री सर्राफा एसोसिएशन उदयपुर के अध्यक्ष यशवंत आंचलिया ने कहा की प्रधानमंत्री जी के बयान से ज्यादा कोई फ़र्क़ पड़ने वाला नहीं है। सिर्फ 10 % का फ़र्क़ आ सकता है, क्यों की चाहे शादियां हो या फिर कोई और कार्यक्रम जिसको सोना खरीदना है वो खरीदेगा ही , वैसे भी जिसको सोना खरीदना होगा वो कम से कम 8 से 10 महीनों पहले ही प्लानिंग करके ही खरीदने आता है। वैश्विक अशांति का माहौल है और ऐसे में मोदी जी ने जो आह्वान किया है की नया सोना नहीं ख़रीदा जाए यानी की 'वोकल फॉर लोकल' जो उनका फार्मूला है उसके तहत जो पुराना सोना है उसी को रीसायकल करके इस्तेमाल में लेने की अपील है। लेकिन अब देखना होगा की पब्लिक इसे कैसे लेती है, क्यों की मोदी जी जब भी पब्लिक को कोई संदेश देते हैं तो उसे हलके में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा की कुछ न कुछ बड़ा होने वाला हैं ऐसा उनका मानना है।
उदयपुर के सर्राफा बाजार में इस मुद्दे को लेकर पूरे दिन चर्चा का माहौल बना रहा और कई व्यापारियों ने चिंता जताते हुए सरकार से स्पष्टता की मांग की।
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